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जिसे मरा समझकर सड़क पर फेंका, उसे 'आयुष्मान' ने दी नई जिंदगी

जिसे मरा समझकर सड़क पर फेंका, उसे \'आयुष्मान\' ने दी नई जिंदगी
रांची, [मनोज कुमार सिंह]। तीन महीने पहले तक मजीद शाह की जिंदगी नर्क से भी बदतर थी। करीब ढाई साल पहले तक लोग उसे पास जाने से भी कतराते थे। मरा समझकर कंपनी वालों ने उसे सड़क के किनारे फेंक दिया था। गरीबी के चलते उसका इलाज भी सही से नहीं हो पा रहा था, लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव विनोद कुमार से मजीद की मुलाकात हुई तो न सिर्फ उसकी जिंदगी ही बदल गई बल्कि उसका पूरा इलाज भी मुफ्त में हुआ। अब वह पूरी तरह से ठीक है और सामान्य जीवन बिता रहा है। मजीद शाह गुमला जिले के पतगच्छा गांव का रहने वाला है।

पेट चीर कर बाहर निकाल दिया डायजेस्टिव सिस्टम

गुमला में पलायन बड़ी समस्या है और इसका फायदा मानव तस्कर उठाते हैं। मजीद जब 12 साल का था, तभी उसे अच्छी नौकरी का झांसा देकर दिल्ली ले जाया गया। जहां उसे एक फैक्ट्री में बंधुआ मजदूर बना दिया गया। आठ साल काम करने के बाद अचानक उसकी तबीयत खराब होने लगी। उसका पेट फूल गया। कंपनी वालों ने उसे सड़क के किनारे फेंक दिया। किसी की नजर पड़ी तो उसे अस्पताल पहुंचा दिया। पेट संक्रमण की बात कह कर अस्पताल वालों ने उसका डायजेस्टिव सिस्टम बाहर निकाल दिया और एक प्लास्टिक के थैले से बांध दिया। जिसमें मजीद का मलमूत्र एकत्र होता था।

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ढाई साल तक बांधे रहा थैली

अस्पताल से फोन आने पर मजीद के परिजन उसे दिल्ली से गुमला लाए। वह रिम्स में इलाज के लिए पहुंचा लेकिन रिम्स ने उसे भर्ती नहीं लिया। उसने रांची के एक निजी अस्पताल में अपना इलाज कराया। जहां एकबार ऑपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हुआ। मजिद करीब ढाई साल तक मलमूत्र वाली प्लास्टिक की थैली बांधे घूमता रहा।

डालसा सचिव विनोद कुमार ने की मदद

मजीद ने जीने की चाह ही छोड़ दी थी। नारकीय जीवन से जल्द छुटकारा चाह रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कोर्ट में अपनी गवाही दर्ज के दौरान उसकी मुलाकात गुमला के डालसा सचिव विनोद कुमार से हुई। उसकी दशा देखकर विनोद कुमार ने सिविल सर्जन से बात कर उसका आयुष्मान कार्ड बनवाया। इसके बाद पीएलवी की मदद से उसे रिम्स लाया गया। जहां पर इलाज के बाद मजीद शाह पूरी तरह से ठीक हो गया है। उसका डायजेस्टिव सिस्टम को पेट के अंदर कर दिया गया और थैली लटकाने से उसे छुटकारा मिल गया है। आयुष्मान कार्ड के चलते उसका पूरा इलाज मुफ्त में हुआ।

गवाही के दौरान मजीद की हालत देखकर डालसा की ओर से पूरी मदद की गई। मामला संज्ञान में आने के बाद रिम्स में उसका बेहतर इलाज कराया गया और अब मजीद पूरी तरह से आम जिंदगी बिता रहा है।

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