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JNU पर शिवसेना ने सरकार के समर्थन का किया ऐलान, JNU पर सरकार के फैसले के साथ हुई खडी

JNU पर शिवसेना ने सरकार के समर्थन का किया ऐलान, JNU पर सरकार के फैसले के साथ हुई खडी
कभी वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय JNU को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी हर तरफ़ मुक्त कंठ से प्रशंसा हो रही है.

लंबे समय बीजेपी तथा केंद्र सरकार भी कटु आलोचक रही शिवसेना भी सरकार के इस फैसले के साथ तनकर खड़ी हो गई है. JNU को लेकर केंद्र सरकार का ये फैसला हिन्दू राष्ट्र के प्रणेता, अमर हुतात्मा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर जी से जुड़ा हुआ है.

खबर के मुताबिक़, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय JNU में अब जल्द ही वीर सावरकर को भी पढ़ाया जाएगा.

हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के बारे में जेएनयू में पढ़ाया जाना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है. दरअसल, स्वातंत्र्यवीर सावरकर अध्यासन केंद्र द्वारा जेएनयू से एक सेंटर बनाने की बात की जा रही है, जहां विद्यार्थी सावरकर के विभिन्न विषयों से संबंधित विचारों का अध्ययन कर सकें.

इसमें सावरकर के हिंदुत्व, राजनीति और सामाजिक दायित्वों से संबंधित विचार मुख्य हैं. इस सेंटर के निर्माण के लिए पूरी रूपरेखा के साथ प्रस्ताव भेजा जा चुका है जो लगभग फाइनल हो चुका है.

JNU में सावरकर जी को पढ़ाये जाने के फैसले का शिवसेना ने स्वागत किया है. शिवसेना ने अपने मुख पत्र सामना में लिखा है कि पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह सबसे महत्वपूर्ण और प्रखर राष्ट्रवादी निर्णय है. शिवसेना ने सामना में लिखा है कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर के विचारों का पाठ दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दिया जानेवाला है.

पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह महत्वपूर्ण और प्रखर राष्ट्रवादी निर्णय है. देश सावरकर की राह चलता तो दुनिया में वह हिंदू महासत्ता के रूप में उदित हुआ होता और पाकिस्तान जैसे राष्ट्र का जन्म ही नहीं हुआ होता. सावरकर इतिहास गढ़नेवाले इतिहासकार थे.

सामना में लिखा है कि राहुल गांधी कहते हैं, सावरकर स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि ब्रिटिशों से माफी मांगकर छूटे भगोड़े हैं. देश की स्वतंत्रता की लड़ाई का इतिहास जिन्हें पता नहीं, वे राहुल गांधी और उनके चोंचलेबाज सहकारियों को अंडमान की उसी कालकोठरी में सिर्फ ५ दिनों तक बंद करके रखो. सिर्फ ५ मिनट के लिए कोल्हू में जोतो और तेल निकालने को कहो.

जहां सावरकर को १० वर्षों तक कैद किया गया था. फिर राहुल गांधी को क्रांति का असली अर्थ समझ में आएगा. सच तो यह है कि सावरकर के विचारों का पाठ सिर्फ ‘जेएनयू’ में ही नहीं बल्कि देश के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाना चाहिए.

सामना में लिखा है कि ‘जेएनयू’ में वीर सावरकर का पाठ शुरू कराकर देशद्रोहियों को चपत लगाना ही जालिम उपाय है. सावरकर का हिंदुत्व, राजनीतिक, सामाजिक भूमिका, धर्म में विज्ञानवाद, पाकिस्तान के संदर्भ में उनकी भूमिका जैसे अनेक विषयों पर इससे वहां के विद्यार्थी, संशोधक और विचारक अध्ययन कर सकते हैं. राहुल के चेहरे पर एक लेजर प्रकाश की चिंगारी देखते ही कांग्रेसवाले डर गए. राहुल की जान को खतरा है और उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए, ऐसा कहकर वे छाती पीटने लगे.

प्रकाश किरण की एक चिंगारी से डरनेवाले राहुल गांधी को ‘जेएनयू’ में जाकर अब अध्ययन करना चाहिए कि ‘दस वर्षों तक विनायक दामोदर सावरकर नामक मृत्युंजय ने अंधेरी कोठरी में किस तरह दिन निकाले होंगे?’ वीर सावरकर का प्रवेश जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुआ है. अब वहां के देशद्रोहियों के अड्डे नष्ट होंगे.

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