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अक्षरधाम की तर्ज पर बने टांकला के रामद्वारा पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर किया उद्घाटन, स्वर्ण कलश की स्थापना

अक्षरधाम की तर्ज पर बने टांकला के रामद्वारा पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर किया उद्घाटन, स्वर्ण कलश की स्थापना
गुजरात व दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर खींवसर क्षेत्र के टांंकला ग्राम में बने संत किशनदास महाराज के भव्य मंदिर में रविवार तो देवल प्रतिष्ठा समारोह आयोजित हुआ। समारोह में पहुंचे हजारो भक्त मंदिर की भव्यता देख अभिभूत हो गए।

देवल प्रतिष्ठा समारोह को भव्य बनाने मे कोई कसर नहीं छोड़ी गई। समारोह को दौरान हैलिकाप्टर से भक्तों पर पुष्प वर्षा की गई। इस कार्यक्रम में विभिन्न रामद्वारो से महंत व साधु संत पहुंचे और देवल प्रतिष्ठा की।

इस समारोह में खींवसर के स्थानीय विधायक हनुमान बेनीवाल व नागौर नगर परिषद के सभापति कृपाराम सोलंकी ने भी शिरकत की और संतों से आशीर्वाद लिया। इस रामद्वारा के निर्माण में करीब 20 करोड़ रुपए लगे।

सारा काम रामद्वारा की ट्रस्ट के पदाधिकारियो की देखरेख में हुआ है। इस रामद्वारा की खास बात यह है कि रामद्वारा निर्माण में उसी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है, जिस बलुआ पत्थर से गुजरात और दिल्ली के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर बने हैं। टांकला का यह रामद्वारा बारीक घड़ाई और नक्काशी के लिए भी जाना जाता है। खास बात ये है कि इस रामद्वारा को बनाने में 200 कारीगरों को 8 वर्ष का समय लगा है। रामद्वारा निर्माण की लागत करीब 20 करोड़ रुपए आई है। मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि इस तरह की बारीक घड़ाई व बेजोड़ नक्काशी प्रदेश में किसी भी दूसरे मंदिर में नहीं है। जिसे देखने के लिए भी अब यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे है। यह रामद्वारा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह रामद्वारा 100 फीट लंबा, 50 फीट चौड़ा और 52 फीट ऊंचा है। रविवार को रामद्वारा में देवल प्रतिष्ठा महोत्सव समारोहपूर्वक आयोजित हुआ।

अखिल भारतीय रामस्नेही सम्प्रदाय के संत किशनदास महाराज के जन्मोत्सव पर रविवार को टांकला गांव स्थित उनके धाम पर पुनर्निर्मित रामद्वारा के उद्घाटन समारोह में प्रदेशभर से श्रद्धालुओं ने शिरकत की। विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच रामद्वारा पर स्वर्ण कलश स्थापित किया गया। इस दौरान टांकला पहुंचे संतों एवं महंतों ने हेलीकॉप्टर से 11 बार रामद्वारे के ऊपर पुष्प वर्षा की। महंतों का बधावणा किया गया। महाराज के जन्मोत्सव को लेकर दिनभर कई धार्मिक आयोजन हुए। इस दौरान संतों एवं महंतों ने श्रद्धालुओं को मुक्ति का सहज मार्ग बताया। अपनी आलौकिक लीलाओं से जगत को आश्चर्यचकित करने वाले रामस्नेही संत की धाम पर आयोजित समारोह को लेकर गांव के चारों रास्तों पर भक्तों का रेला नजर आया। हरजस गाती महिलाएं ऊंट छकड़ों, ट्रेक्टर-ट्रोलियों व जीपों में सवार होकर संत के धाम पहुंची।

अल सुबह से पहुंचे भक्तों के जत्थे

अल सुबह से ही भक्तों के जत्थे धाम पर पहुंचने शुरू हो गए। दोपहर तक मन्दिर एवं प्रवचन स्थल पर पैर रखने की जगह नहीं थी। करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने संत के धाम पर मत्था टेककर उद्घाटन समारोह में भाग लिया। प्रदेशभर से आए करीब 600 संतों के प्रवचन सुनने के लिए शनिवार रात को ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए। रविवार दोपहर तक तो गांव के सभी मुख्य मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए।

हेलीकॉप्टर देखने उमड़े ग्रामीण

रामद्वारा पर पुष्प वर्षा के लिए आए हेलीकॉप्टर को देखने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े। इस दौरान किशनदास महाराज देवल के महंत नरसिंहदास महाराज, संत मोतीराम महाराज, संत अर्जुनदास महाराज, टांकला सरपंच गिरधारीराम चौकीदार ने हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की। हेलीकॉप्टर ने 11 राउण्ड कर देवल पर पुष्प वर्षा की।

मन्दिर से दूर लगाई दुकानें

व्यवस्थाएं सुचारू रखने के लिए मन्दिर परिसर में लगने वाली दुकानों को दूर लगाया गया। इस दौरान टांकला-भेड़ मार्ग पर लगी अस्थाई दुकानों पर ग्रामीणों ने खरीददारी की। सौन्दर्य प्रसाधन, खिलौने, मिठाईयां, मणिहारी सहित विभिन्न प्रकार की दुकानों पर बच्चों, महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। बच्चों ने खाने-पीने की चीजों का आनन्द लिया। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए दुकानों को मन्दिर के समीप नहीं लगाने दिया। शांति व्यवस्था को लेकर पुलिस उपाधीक्षक सुभाष मिश्रा, खींवसर थाना प्रभारी हरलाल मीणा, भावण्डा थाना प्रभारी अशोक बिस्सु सहित पुलिस जाप्ता मौजूद रहा।

किया अलौकिक लीलाओं का वर्णन

समारोह के दौरान आयोजित धर्म सभा में संतों ने अखिल भारतीय रामस्नेही सम्प्रदाय के संत किशनदास महाराज के द्वारा की गई अलौकिक लीलाओं का वर्णन किया। संतों ने कहा कि किशनदास महाराज ने अध्यात्मिक जीवन में लोगों को जरा मरण से मुक्ति का सहज मार्ग बताया था। उनकी इस तपोस्थली पर सच्चे मन से आने वाले श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पांचलासिद्धा जसनाथ आश्रम के महंत योगी सूरजनाथ महाराज ने कहा कि यहां संत किशनदास महाराज सहित अनेक संतों ने धरती पर अवतार लेकर मनुष्य मात्र का कल्याण किया है। उन्होंने कहा कि संतों के कारण ही आज दया धर्म एवं संस्कृति जीवित है। दादू धाम नारायणा के पीठाधीश्वर गोपाल दास महाराज ने कहा कि मानवता ही मनुष्य के लिए सबसे बड़ी सेवा है, जो मनुष्य संतों की शरण में रहकर ईश्वर की भक्ति करता है वो भव सागर के पार उतर जाता है। उन्होंने गृहस्थ जीवन में भक्ति को सर्वोपरी बताया है। खेड़ापा रामधाम के महंत पुरूषोत्तम दास महाराज ने कहा कि मनुष्य को मोह माया एवं सांसारिक भोग विलासिता का त्याग कर ईश्वर की भक्ति में मन लगाना चाहिए, ताकि उसके वर्तमान एवं अगला जन्म सुधर सके। उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति में मन लगाने से मनुष्य जीव का कल्याण हो जाता है। सिंह स्थल रामधाम के पीठाधीश्वर क्षमाराम महाराज ने कहा कि मनुष्य को संतों का सानिध्य करना चाहिए, ताकि वो पथ भ्रष्ट नहीं हो और सद्कर्म में लगा रहे। संतों की शरण में आने वाले मनुष्य का कार्य ही नहीं जीवन भी सफल हो जाता है। इस दौरान धर्म सभा को चाडी धाम के महंत रामभरोस महाराज, रेण के संत सज्जनराम महाराज, डेह धाम के महंत आनन्दराम महाराज, भोजास धाम के महंत रामनिवास महाराज, ब्यावर धाम के संत माधोदास महाराज, खेड़ापा धाम के संत गोविन्द गोपाल महाराज, डेह धाम के श्रीराम महाराज, सिणोद धाम के महंत आत्माराम महाराज, सीताराम महाराज सहित अनेक संत एवं महंत मौजूद थे।

बिछाए पलक पावड़े

समारोह में आस-पास के गांवों सहित विभिन्न प्रान्तों से आने वाले श्रद्धालुओं के खाने, पीने एवं ठहरने के लिए सेवा समिति के कार्यकत्र्ता दिनभर जुटे रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं की सेवा में पलक पावड़े बिछा दिए। कार्यक्रम में शांति व्यवस्था बनाए रखने एवं सुचारू यातायात संचालन के लिए दिनभर जुटी रहे। विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

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